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मूल्य नहीं मूल्यबोध महत्वपूर्ण होता है: जिनमणिप्रभ
इन्दौर. मनुष्य जीवन बहुत अमूल्य है या कहे हमारा जीवन कोहिनूर की तरह होता है. व्यक्ति आज अपने समय और जीवन के यथार्थ मूल्य नही समझकर छणिक पदार्थो के पीछे समय और श्रम व्यर्थ करता है इसीलिए ढाक के तीन पात वाली स्थिति ही बनी रहती है. इस मानव जीवन मे परमात्मा की देशना को जीवन मे उतारते हुए आत्मा व समय के मूल्य को समझकर मूल्य बोध का उदाहरण पेश करे। किसी भी वस्तु का मूल्य महत्वपूर्ण नही बल्कि मूल्य बोध महत्वपूर्ण होता है.
यह बात चातुर्मास के लिए महावीर बाग में विराजित आचार्य जिनमणि प्रभ सूरीश्वरजी महाराज ने , मनुष्य जीवन मूल्यवान विषय पर श्रावक श्राविकाओं को सम्बोधित करते हुए कही.
आचार्यश्री ने कहा कि सूर्य उदय होकर अस्त होता है, फूल खिलकर मुरझाते है उसी प्रकार मानव जीवन भी अस्तित्व में आकर विभिन्न अवस्थाओं को पार कर एक दिन अस्त हो जाता है. जिस प्रकार पत्थर की कीमत एक जौहरी जानता है उसी तरह हमें हमारे जीवन को एक जौहरी की तरह उसकी कीमत समझकर जीना चाहिए।
मूल्य बोध महत्वपूर्ण है. हमने हमारे मूल्य का बोध नहीं किया है. जिस समय हमें हमारे जीवन के मूल्य का बोध हो जाएगा तो हमे जीवन की असली कीमत या मूल्य समझ मे आ जायेगा. उन्होंने कहा कि जब तक जीवन का मूल्य समझ नहीं आता तब तक हमारा दृष्टि कोण नही बदलता.
चेतना को जगाना होगा
आचार्यश्री ने कहा कि जब जीवन के मूल्य का बोध हो जाता है तो उसकी कीमत समझ मे आती है. मूल्य बोध के अभाव में जीवन को हम यू ही बर्बाद नही करें बल्कि जीवन के मूल्य बोध को समझे. हमें हमारी चेतना को जगाना होगा. यही जिज्ञासा प्रत्येक मनुष्य में होना चाहिए. शनिवार को महावीर बाग में संजय छाजेंड़, छगनराज हुंडिया, डूंगरचंद हुंडिया, सुजान चोपड़ा, सहित हजारों की संख्या में श्रावक-श्राविकाऐं मौजूद थे।


